रोज जान दे रहे हैं 175 विवाहित पुरुष

175 married men committing suicide everyday in India कोलकाता, 3 अक्तूबर । भारतीय दंड संहिता की धारा 498अ का विवाहित पुरूषों के खिलाफ दुरूपयोग किए जाने की वजह से भारत में हर नौंवे में मिनट में एक विवाहित पुरूष आत्महत्या करता है। इस संदर्भ में आई रिपोर्ट के अनुसार इन आत्महत्याओं के कारण मरने वालों की संख्या प्रति वर्ष 64 हजार पहुंच गई है।

हृदय-नेस्ट ऑफ फैमिली हारमोनी नामक गैर सरकारी संगठन के अध्यक्ष डी एस राव संस्था द्वारा किये गये सर्वेक्षण के हवाले से कहते हैं, ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े विवाहित महिलाओं की तुलना में विवाहित पुरूषों द्वारा आत्महत्या के ज्यादा मामले दर्शाते हैं। वर्ष 2012 में लगभग 64 हजार विवाहित पुरूषों ने आत्महत्या की थी और इस साल आत्महत्या करने वाली विवाहित महिलाओं की संख्या 32 हजार थी।”

राव ने कहा कि 498अ के दुरूपयोग की वजह से और परिवार का सदस्य होने के नाते उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने के कारण बूढ़े माता-पिता और पुरूष के अन्य संबंधियों को भी कष्ट झेलना पड़ता है।

एनजीओ के एक अधिकारी अमित गुप्ता ने दावा किया, ‘कानून अपने उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पा रहा है और लोगों का एक वर्ग अपना गुस्सा निकालने और उगाही करने के लिए विवाहित पुरूषों व उनके परिवारों के खिलाफ इसका दुरूपयोग करता है।’ सर्वेक्षण के अनुसार, पश्चिम बंगाल में इस धारा के अंतर्गत आने वाले मामलों की संख्या पिछले दो साल में 11 प्रतिशत की दर से तेजी से बढ़ी है लेकिन दोषसिद्धि की दर 6.3 प्रतिशत से गिरकर 4.4 प्रतिशत रह गई।

एनजीओ के एक अधिकारी इंद्रानील गुप्ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ऐसे मामलों की संख्या 1.06 लाख है, जो कि इस धारा के तहत दर्ज कराए जाने वाले मामलों की कुल संख्या के 20 प्रतिशत से ज्यादा है। पिछले साल इन मामलों के तहत 80 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

यह एनजीओ विवाहित पुरूषों के अधिकारों के समर्थन में और उनके खिलाफ इस धारा के तहत झूठे मामले दर्ज कराए जाने पर उन्हें मानसिक सहयोग देने के लिए काम करता है। पुलिस का कहना है कि दर्ज कराए गए मामलों को झूठा साबित करना ‘बेहद कठिन’ है।

इस एनजीओ द्वारा हासिल नतीजों को पश्चिम बंगाल महिला आयोग की अध्यक्षा और प्रमुख महिला कार्यकर्ता सुनंदा मुखर्जी ने खारिज कर दिया। उन्हें लगता है कि अभी भी देश में महिलाओं का एक ऐसा बड़ा वर्ग है जिसे उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किए जाने की जरूरत है।

वे कहती हैं, ‘ये (एनजीओ के नतीजे) कुछ और नहीं बल्कि पुरूषों की उग्रभक्ति मात्र हैं। अभी भी महिलाओं का एक ऐसा बड़ा वर्ग है जिसे उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किए जाने की जरूरत है और जो नियमित रूप से प्रताडि़त किया जाता है।’ हृदय-नेस्ट ऑफ फैमिली हार्मोनी ने उन पीडि़तों और कॉल करने वाले लोगों को मुफ्त सलाह देने की हेल्पलाइनें चलाई हैं, जिनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज कराए गए हैं। इसके अलावा यह जानकारी देने और कानूनी मदद उपलब्ध करवाने का भी काम करती है। गुप्ता ने कहा, ”बहुत से लोग हमारे पास मदद के लिए आते हैं। उनमें से कुछ तो मानसिक रूप से इतने पीडि़त होते हैं कि वे आत्महत्या के कगार पर होते हैं।”

उन्होंने कहा, ‘हमारे पास अदालती आदेशों का संग्रह और ऐसे अनुभवी सदस्य हैं जो 498अ के झूठे मामले में फंसाए गए इन पुरूषों को केस लडऩे का मार्गदर्शन देते हैं।’ वे कहते हैं, ‘आरटीआई और जनहित याचिकाएं ऐसे पुरूषों के अधिकारों के लिए लडऩे का औजार हैं।’

”अभी तक हम यह नहीं जान सके हैं कि इन मामलों को कैसे झूठा साबित किया जाये ,क्योंकि ये मामले मानसिक प्रताडऩा के हैं। आप किस तरह साबित करेंगे कि किसी को मानसिक रूप से प्रताडि़त किया गया है?”

-पल्लब कांती घोष, पुलिस सह आयुक्त (अपराध)

क्या है धारा 498(अ)

यदि किसी महिला का पति या उसका कोई संबंधी उसके साथ निर्मम व्यवहार करता है तो उसे कम से कम तीन साल के लिए कैद की सजा दी जायेगी और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।

धारा 498अ का दुरुपयोग

वर्ष 2012 में लगभग 64 हजार विवाहित पुरूषों ने आत्महत्या की। जबकि आत्महत्या करने वाली विवाहित महिलाओं की संख्या 32 हजार थी।

Source: Dainik Tribune

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